

फसल अवशेष/पराली जलाने से पर्यावरणीय क्षति के साथ मृदा स्वास्थ्य एवं मित्र कीटों पर पडता है कुप्रभाव।
पराली जलाने में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अर्थदंड की कार्यवाही की जायेगी सुनिश्चित।
संपादक आनन्द शुक्ला।
कानपुर देहात। 19 अक्टूबर 2024
जिलाधिकारी आलोक सिंह के निर्देशन में उप कृषि निदेशक रामवचन राम द्वारा अवगत कराया गया कि प्रायः खरीफ फसलों की कटाई के समय किसनों द्वारा अज्ञानता वश फसल अवशेषों/पराली को जला दिया जाता है, जिससे निकला धूम्र मनुष्यों विशेषकर, बच्चो, वृ़द्धो, नेत्र एवं श्वास से सम्बन्घित समस्याओं से ग्रसित व्यक्तियों के साथ-साथ अन्य जीव-जन्तुओं के लिए अत्यंत हानिकारक है। उत्तर प्रदेश शासन के मार्ग निर्देशन में जिला प्रशासन जनपद में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम हेतु व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जहां एक ओर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसानों एवं पराली जलाने में दोषी पाए जाने पर होने निर्धारित अर्थदंड की कार्यवाही के संबंध में व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर पराली जलाने में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अर्थ दंड की कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
फसल अवशेष/पराली जलाने से जहाॅ एक ओर पर्यावरणीय क्षति, मृदा स्वास्थ्य एवं मित्र कीटों पर कुप्रभाव पडता है वही दूसरी ओर फसलों एवं ग्रामों में अग्निकाण्ड होने की भी सम्भावना होती है। फसल अवशेष जलाने से मिट्टी के तापमान में वृद्धि होने से मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा पर विपरीत प्रभाव पडता है, मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्म जीव नष्ट होते है जिससे जीवांश के अच्छी प्रकार से सड़ने में भी कठिनाई होती है। मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फसल अवशेष जलाये जाने पर पूर्णतः रोक लगाते हुए इस दण्डनीय अपराध की श्रेणी में रखा है तथा यदि किसी व्यक्ति द्वारा फसल अवशेष/पराली जलाने की घटना घटित की जाती है तो मा0 राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा-24 एवं 26 के अन्तर्गत उसके विरूद्ध पर्यावरण क्षतिपूर्ति हेतु 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए रु0 2500/- प्रति घटना, 02 से 05 एकड़ के लिए रु0 5000/- प्रति घटना और 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए रु0 15000/- प्रति घटना की दर से अर्थदण्ड वसूले जाने का प्राविधान है।
उन्होंने समस्त सम्मानित किसान भाईयों से अनुरोध है कि फसल अवशेष/पराली कदापि न जलायें।