
संपादक आनन्द शुक्ला।

राज्य अध्यापक अवार्डी नवीन कुमार दीक्षित ने पेपर पर लिखकर बताया कि उर्दू के कुछ अक्षरों में दो चश्मी जोड़ने पर हिंदी वर्णमाला का अगला अक्षर बनाकर भाषा से उर्दू भाषा में करते हैं प्रयोग।
भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और देश की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करने के लिए यह उत्सव महाकवि सुब्रमण्यम स्वामी की जयंती के परिप्रेक्ष्य में आयोजित किया गया है। उक्त बात आयोजन प्रभारी डॉ प्राची शर्मा ने जनपद से उत्सव में आए शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारतीय भाषाएँ हमारी समृद्धशाली, गौरवपूर्ण संस्कृति की परिचायक हैं।
डायट प्रवक्ता मोहम्मद इमरान ने कहा कि इस उत्सव का उद्देश्य मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षण माध्यम के रूप में अपनाने पर जोर दिया जाना है|
राज्य अध्यापक पुरस्कार से अलंकृत शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित ने भाषाओं की परस्पर निर्भरता को दर्शाते हुए दिखाया की अंग्रेजी के नावेल के शब्द को उर्दू में नावेल निगारी के रूप में स्वीकारा गया है, साथ ही उर्दू के ते में दो चश्मी हे जोड़ कर त को थ, टे में दो चश्मी हे जोड़ कर ठ, चे में दो चश्मी हे जोड़ कर छ जीम में दो चश्मी हे जोड़ कर झ , बे में दो चश्मी हे जोड़ कर भ पढ़ते हैं जो यह दर्शाता है कि भारत की विविध भाषाई एवं परंपराएँ राष्ट्रीय एकता को कैसे प्रोत्साहित करती हैं । एक सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करती हैं ।एस आर जी अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि भाषा सम्प्रेषण का सशक्त माध्यम हैं भाषा जब बोली बन जाती है तो जन जन के अन्तर्मन में उत्तर जाती है।इस अवसर पर आशुतोष शुक्ला, आलोक श्रीवास्तव, विमल चन्द्राकार, राजीव मौर्य, विश्व विजय सिंह, अजीत सिंह ,उमेश कुमार,संतोष कुमार यादव आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।