
संपादक आनन्द शुक्ला।

गजनेर कानपुर देहात।जनपद कानपुर देहात के गजनेर क्षेत्र के ग्राम जिठरौली में नीता सिंह पत्नी जीतेन्द्र सिंह चौहान द्वारा श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ एवं गयाभोज का आयोजन किया गया।श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर कथावाचक आचार्य पंडित मनोज द्विवेदी द्वारा श्रीकृष्ण जन्म कथा का वर्णन किया।आचार्य जी ने भक्तों को भक्ति राह मर चलने की बात की उन्होंने बताया कि जब कंस के अत्याचार से मथुरा क्षेत्र के साथ साथ आस पास के लोग परेशान हो रहे थे तब भगवान श्री कृष्ण का जन्म लिया।भगवान कृष्ण को हम लीला पुरषोत्तम के नाम से भी जानते है।क्योंकि उन्होंने जन्म लेते ही अपनी लीलाओं को दिखाना प्रारंभ कर दिया था।आचार्य पंडित मनोज द्विवेदी ने बताया कि जब कृष्ण का जन्म हुआ तब जेल के सारे ताले टूट गए सभी भय मुक्त हो गए।माँ देवकी ने कंस से अपने आठवे पुत्र को बचाने के लिये वासुदेव जी को वृंदावन छोड़ने को कहती है।वासुदेव जी जब कृष्ण जी को पालने में रख कर जब निकले तो माँ यमुना ने जब देखा कि भगवान पालने में है तो उनके पैरों को छूने के लिय अपना प्रवह तेज़ किया।जब भगवान श्री कृष्ण ने देखा कि अगर ऐसा ही यमुना अपना प्रवाह बढ़ाएंगी तो मेरे बाबा यमुना मर डूब जायेंगे।उसी समय श्रीकृष्ण जी ने अपने पैर को पालने के बाहर निकाल कर यमुना जी को रोका। कृष्ण जन्म की जानकारी पाते ही कंस ने कृष्ण जी को मारने का प्रयास करना सुरु कर दिया।सबसे पहले कंस ने कान्हा जी को मारने के लिये पूतना को भेजा।पूतना जब वृंदावन गयी तो उसने देखा कि कान्हा को देखने के लिए सारे गोपियां आयी हुई है।वो भी गोपियों में मिल कर कृष्ण को अपने हाथों में लेने का प्रयास करने लगी। भगवान जान गए कि पूतना आयी है पूतना ने गोपियों से कान्हा को छीना और बोली लाला भूखा है लाओ मैं इसे अपना दूध पिला दे।पूतना ने श्री कृष्ण जी को लेकर अपने वक्ष स्तनों से लगाया ।जैसे ही भगवान नर दूध पान करना सुरु किया तो उसी से व्व पूतना के प्राण हरने लगे।पूतना भगवान को लेकर बन की ओर उड़ी सब उसके पीछे पीछे दौड़े।जब वहां जाकर देखा तो पूतना पड़ी थी और भगवान वही बैठे खेल रहे थे।आचार्य जी ने बताया कि जब श्री कृष्ण का जन्म हुआ उस समय नंद बाबा की उम्र 85 वर्ष की थी और माँ देवकी की उम्र 82 वर्ष थी।आचार्य जी के मुखार बिंदु से भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण की कथा का रस पान किया।