
संपादक आनन्द शुक्ला। (9997891761, 8009149951)

माती-कानपुर देहात। जिले के बारा गांव में संचालित टोल प्लाजा कुछ लोगों के लिए अपना कुर्ता चमकने का अड्डा बन गया है।भले ही किसी जघन्य अपराध को करने के बाद लंबे समय तक कारागार में क्यों रहना पड़ा हो लेकिन अब ईमानदार सरकार के कार्यकाल में वह नेता बन चुके हैं।अवैध खनन से लेकर अनेकों मामलों तक में चर्चित रहने वाले उपरोक्त तथाकथित नेता के भी निशाने पर आखिर जिले का टोल प्लाजा ही आया है।सत्ता पार्टी का झंडा और हूटर लगी सफारी गाड़ी टोल पर पहुंचे और माननीय तथाकथित उपरोक्त नेता जी का एक पल भी वहां ठहरना संभवतः मुनासिब नहीं होता है।नतीजा फिर चाहे बूम टूटे या फिर किसी टोल कर्मी को गाली अथवा थप्पड़ रसीदना पड़े यह नेताजी की शान होती है।अलग बात है उपरोक्त मामले से भयभीत टोल के अधिकारी और कर्मचारी उफ तक नहीं कर पा रहे हैं।भारत सरकार से सीधे तौर पर जुड़े उपरोक्त टोल पर सीधी गुंडागर्दी जनपद वासियों को यह बताने के लिए पर्याप्त है कि यहां किस कदर रामराज्य चल रहा है।टोल के अधिकारी दहशतज़दा होकर खामोश बने हैं।जबकि नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोग यह जरूर बोल देते हैं कि एक न एक दिन प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाएगा।
काले रंग की कानपुर महानगर से आने वाली स्कॉर्पियो का कहर अभी टोल कर्मियों के सिर चढ़कर बोल ही रहा है।लेकिन अब एक और तथा कथित नेता जी मैदान में कूद चुके हैं। टोल कर्मियों की माने तो उपरोक्त नेता जी के आगमन पर किसी प्रकार का विवाद न हो इसे लेकर गंभीर टोल कर्मी उनके लिए बूम खोल देते हैं। लेकिन नेता जी अगर आराम से निकल गए तो रौब किस पर गांठा जाएगा।बस इसी मर्यादा की लाज रखने के लिए नेता जी टोल के कर्मियों पर टूट पड़ते हैं फिर चाहे उम्दा क्वालिटी की गालियां देना हो या किसी के साथ मारपीट नेताजी पूरी तरह सक्रिय नजर आते हैं।महीनो से टोल पर हो रहे हो उपरोक्त तांडव की जानकारी अब मीडिया तक पहुंचने लग गई है प्रकरण के संबंध में टोल के अधिकारी और कर्मचारी कुछ भी दहशत के कारण बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।लेकिन यह प्रार्थना जरूर कर रहे हैं कि प्रशासन यदि उनका सहयोग करने लग जाए तो वास्तविक रूप से रामराज्य किसे कहा जाता है यह सब की समझ में आ जाएगा।लेकिन मामला सीधे तौर पर सत्ता पक्ष से जुदा होने के चलते प्रशासन हाथ डालता भी है यह प्रश्न सभी को परेशान किए हैं।दबी जुबान टोल के कर्मचारी यह बोलते रहते हैं कि अब यहां रहना कतई उचित नहीं है क्योंकि कब कौन आकर गाली देने लगे और कब कौन मारपीट करने लग जाए यह निश्चित नहीं है।कर्मचारी तो यहां तक बोलते हैं कि शिकायत करने के बाद भी कोई जिम्मेदार इस बात की जांच तक करने नहीं आता है कि आखिर इस घटना का जिम्मेदार कौन है और घटना सही है या गलत ?