
संपादक आनन्द शुक्ला।

मुंबई : देवेंद्र के लाइमलाइट में आने से पूर्व ही अमृता बैंक में उच्च पद पर थीं, फ़िल्म में गाना गा चुकी थीं. पति के 2014 में मुख्यमंत्री बनने के पश्चात भी उन्होंने अपनी नौकरी, अपनी ऐक्टिविटीज़ बंद नहीं की बल्कि और बढ़ा दीं. आज वह एक्सिस बैंक में वाइस प्रेसिडेंट होने के साथ हर मुद्दे पर मुखर रहने वाली महिला हैं. पति की परछाईं से परे उनकी एक अपनी आइडेंटिटी है.
प्रायः समाज राजनेताओं की पत्नी से यही उम्मीद रखता है कि वह घूँघट काढ़ एक बार वोट माँगने आ जायें, शेष वह दिखें न. अमृता इस स्टीरियो टाइप से पूरी तरह अलग हैं. जितने उनके पति लाइमलाइट में रहते हैं, उससे ज्यादा वह रहती हैं. ज़ाहिर सी बात है कंज़र्वेटिव्स को वह बिलकुल पसंद नहीं आती हैं. राइट विंग द्वारा अक्सर ट्रॉल होती रहती हैं, पर इससे आज तक उन पर एक पैसा फ़र्क़ न पड़ा, उल्टे उनके जो कार्य कलाप हैं वह और मुखर हो गये. यह बहुत बड़ा सबक़ उन महिलाओं के लिए होना चाहिए जो केवल इस डर से कि लोग क्या कहेंगे सकारात्मक कार्य करना छोड़ अपने को एक कोठरी में बंद कर जीवन जीती है।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के केस में नि: संदेह कहा जाएगा कि सफ़ल व्यक्ति के पीछे सफ़ल महिला का हाथ है।